नास्तिक किसे कहते है नास्तिकता (Atheism) नास्तिक और आस्तिक

 नास्तिक किसे कहते है नास्तिकता (Atheism) नास्तिक और आस्तिक 


नास्तिक क्या नहीं मानते



नास्तिक वह है जो अपने आप में विश्‍वास नहीं करता ना  भगवान ना ईस्वर ना God ,  ना देवी देवताओ और ना किसी  अवतार  को मानते  नास्तिक वह  हैँ जो  अपने आप मै भी  विश्वास नहीं करते  हैँ   और  ना  नास्तिको का ना कोइ धर्म हैँ  

 और  नास्तिक लोग न तो  अपने बनने  वाले पर भी विश्वास नहीं करते हैँ  

 लेकिन आप का  भाई आप को   बताऐगा  नास्तिकों के  बारे मैं


 


नास्तिक  किसको कहते  हैँ 

  

दोस्तों आज की इस पोस्ट मैं ,  आपको  नास्तिक लोगो      के बारे मैं बताएगा नास्तिक लोगो  शायद साइंस पर विश्वास करते हैं  लेकिन साइंस को इस दुनिया में  500 साल  हुआ  हैँ! और नास्तिक लोगो सिर्फ  साइंस को मानते हैं

 

आस्तिक  लोगो  का विश्वास 

ईश्वर में विश्वास करनेवाला व्यक्ति।

आस्तिक का मतलब क्या है?


आपको बता दें कि आस्तिक नाम का अर्थ  इस को  God , Allahभगवान पर भरोसा है, अस्तित्व और भगवान में विश्वास होता है। 


 ईश्वर अल्लाह भगवान  God परमेश्वर,  सब  मालिक एक हैँ!  कोइ भगवान कहता  हैँ कोइ God और कोइ अल्लाह कहते हैँ ,  सब का मालिक और खालिक  एक है ,   जिसने हमेंं  सब   बनाया  और उसने  पूरी क़ायनात को बनाया हैँ  ,मुस्लिम, हिन्दू, ईसाइ, सिख,  भी विश्वास करते  हैँ  के हमारा  बनाने  वाला हैँ एक ही खालिक  हैँ  और हम सब  ईश्वर को मानते  है    हमारा विश्वास हैँ  के जो कुछ क़ायनत  मैं सब God न ही बनाया हैँ,  


नास्तिक का नज़रिया 


😭😭😭


अफ़सोस हैँ लेकिन नास्तिक  किसी  पर भी विश्वास नहीं करते  जो बहुत अफ़सोस की बात हैँ ये लोग साइंस पर विश्वास करते हैँ  😭 अफ़सोस है की  इस क़ायनत  को बनने  वाले को  नहीं मानते हैँ

  


मरने के बाद' अल्लाह कैसे जिंदा करेगा? नास्तिक को जवाब


क़ुरान पवित्र  आयात करिमा 


क्या (इनकार करनेवाले) मनुष्य नहीं देखते कि हमने उसे  मानी (वीर्य ) से पैदा किया, फिर क्या देखते है कि वह प्रत्क्षय विरोधी झगड़ालू बन गया. और उसने हमपर फबती कसी और अपनी पैदाइश को भूल गया. कहता है,..


कौन हड्डियों में जान डालेगा, जबकि वे (सड़ गल कर) ख़ाक हो चुकी होंगी?"


"उनमें वही जान डालेगा जिसने उनको पहली बार पैदा किया. वह तो प्रत्येक संसृति को भली-भाँति जानता है. वही है


 जिसने तुम्हारे लिए हरे-भरे वृक्ष से आग पैदा कर दी।


तो लगे हो तुम उससे जलाने।"


 जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया उसे इसकी सामर्थ्य नहीं कि उन जैसों को पैदा कर दे?


क्यों नहीं, जबकि वह महान स्रष्टा , अत्यन्त ज्ञानवान है


उसका मामला तो बस यह है कि जब वह किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करता है तो उससे कहता है, "हो जा!" और वह हो जाती है.


 अल्लाह न क़ुरान मैं  फ़रमाया हैँ


सूरह  सफात 


 नास्तिक  लोगो 


नास्तिकता 

(16) कहते हैं कि  क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे?

( 17 ) और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)?


अल्लाह, God  आप को एक   मानी  (वीर्य ) के कतरे  से बना सकता हैँ क्या आप  को दुबारा जिन्दा नहीं कर  सकता क्या   जी हैँ , जब हम कुछ भी  ना थे  उसे खालिक  न हमें बनाया   क्या वो मालिक हमे दुबारा  नही  है क्या


   दोस्तों अल्लाह  हमें  क़यामत के दिन दुबारा जिन्दा करगा  और हम से  सवाल क्या जयेगा अच्छे और बुरे का

   जो लोग नास्तिक हैँ तो  एक बार इस   पढ़े 

फिर अपने बनाने  वाले को  पहचाने  


अल्लाह न क़ुरआन सब के लिए उतारा हैँ   कोइ ये ना समझे के ये क़ुरान  मुस्लिम के लिए हैँ ये  सब  के लिए नाजिल किया गया है, और कुरान ए करीम अंतिम पैगंबर  नाजिल किया गया है,

 जो कुरान ए करीम हजरत जिब्राइल फरिश्ता  आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम  गारे हीरा  मैं   सूरह इक़रा नाजिल की गई है 


اقرا باسم ربك الذي خلق خلقنا الانسان من علق

 

 नाजिल की गई है,  

 कंपलीट कुरान 23 साल में नाजिल किया गया है, 


  कुछ कुरान की आयात   लिख देता हूं,


 एक बार कुरान को जरूर पढ़ना 

ये कुरान सब के लिए हिदायत है


 अल्लाह ने कुरान में फरमाया


और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजिल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों


(QURAN 2:170)


 और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि ख़ाक नहीं समझते


 (QURAN 2:171)


 बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में जल की है छुपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अँगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है


(QURAN 2:174)


यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही


मोल ली और बख्शिश (ख़ुदा की) के बदले अज़ाब बस वह लोग दोज़ख़ की आग को क्योंकर बरदाश्त करेंगे

 (QURAN 2:175)


 और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे गुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख़्त के लिए जहन्नुम काफी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है


(QURAN 2:206)


 क जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे


 (QURAN 2:161)


 न तो उनके अज़ाब ही में तख़फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी


(QURAN 2:162)


 और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही कता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है


(QURAN 2:163)


बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दोबदल कश्तियों (जहाज़ों) में जो लोगों के नफे


(माले तिजारत वग़ैरह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर किस्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है ( इन सब बातों में) अक़्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशनियाँ हैं


 (QURAN 2:164)


और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक़्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़वत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है


 (QURAN 2:165)


 ( वह क्या सख़्त वक़्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे और अपनी आखों से (चश्में ख़ुद ) अज़ाब को देखेगें और उनके बाहमी ताल्लुक़ात टूट जाएँगे


 (QURAN 2:166)


 और पैरव कहने लगेंगे कि अगर हमें कहीं फिर (दुनिया में) पलटना मिले तो हम भी उन से इसी तरह अलग हो जायेंगे जिस तरह ऐन वक़्त पर ये लोग हम से अलग हो गए यूँ ही ख़ुदा उन के आमाल को दिखाएगा जो उन्हें (सर तापा पास ही) पास दिखाई देंगें और फिर भला कब वह दोज़ख़ से निकल सकतें हैं


 (QURAN 2:167)


अगर मरने के बाद पता चले कि कोई ख़ुदा नहीं है! तो? नास्तिक को जवाब


सवाल किया गया के एक शख़्स ऐसे  हैँ  जो God की ज़िन्दगी भर इबादत करता  रहा हैँ  जो  उसे दिखाई नहीं देता उसके अहकामात पर सारी ज़िन्दगी अमल करता रहा, और नेक अमल करता रहा लेकिन मरने के बाद उसे पता चले कि कोई  कोइ God या ईश्वर या अल्लाह नहीं! तो क्या होगा ! 


😭😭😭


ठहरिए!

इस सवाल का जवाब ज़रूर दिया जाएगा लेकिन इस सवाल में एक सवाल हम भी सामिल कर लेते हैं; फ़र्ज़ करो एक शख़्स सारी ज़िन्दगी नास्तिकाना मुन्किराना अंदाज़ में गुज़ारता है किसी ख़ुदा की इबादत नहीं करता,,  किसी ख़ुदाई क़ानून को नहीं मानता,  स्वर्ग और जहन्नम का   इंकार करता है  और कयामत, और  मरने  के बाद दोबारा जिन्दा क्या जाने पर फिर मरने के बाद उसे पता चलता है कि ख़ुदा हक़ है! जन्नत और जहन्नम हक़ है! आख़िरत एक सच है!

 अब मुझे बताओ तब क्या होगा ?

यह सवाल हमने इस लिए सामने रखा है कि तस्वीर के दोनों रुख़ सामने रख कर सोचना चाहिए तभी आप अपने नफ़े का सौदा कर सकते हैं!

पहले सवाल का तो बड़ा सादा सा जवाब है कि आपने सारी ज़िन्दगी एक ख़ुदा  God की इबादत की लोगों से रहम दिली की सिला रहमी की नेक अमल किए, मरने के बाद पता चला कि कोई ख़ुदा नहीं, तो कुछ भी नहीं होगा!

आप मरकर मिट्टी हो जाएंगे! और दोबारा नहीं उठाए जाएंगे! आपके दिमाग़ का शटर जो मौत के वक़्त बंद हुआ था वो बंद ही रहेगा!

यानी अपनी पूरी स्पेंड की गई ज़िन्दगी पर पछताने के लिए आपको दोबारा ज़िन्दा करके उठाने वाला भी नहीं होगा!

लेकिन ठहरिए! अगर ऐसा हुआ कि एक शख़्स ने सारी ज़िन्दगी नास्तिकाना मुन्किराना अंदाज़ में गुजारी शराब ओ शबाब में मगन रहा अल्लाह के क़ानून का ख़िलाफ़ चलता रहा, फिर मरने के बाद उसे पता चला कि ख़ुदा तो मौजूद है! तब क्या होगा?

तब यह होगा कि उसे दोबारा ज़िंदा किया जाएगा उससे उसकी पूरी ज़िन्दगी का हिसाब लिए जाएगा! और आख़िर में उसे हमेशा हमेश के लिए जहन्नम में झोंक दिया जाएगा!

अब उसके पास पछताने के लिए एक न ख़त्म होने वाली ज़िन्दगी होगी!


इसी लिए अल्लाह रब्बुल आलमीन अपने कलाम में इरशाद फ़रमाता है:

ہٰذِہٖ جَہَنَّمُ الَّتِیۡ کُنۡتُمۡ تُوۡعَدُوۡنَ

ये वही जहन्नम है जिससे तुमको डराया जाता रहा था।


اِصۡلَوۡہَا الۡیَوۡمَ بِمَا کُنۡتُمۡ تَکۡفُرُوۡنَ

आज इसमें दाख़िल हो जाओ जिसका तुम कुफ्र किया करते थे।

(सूरह यासीन: 63,64)


 


🕷️ 🕸️मकड़ी शब्द सिर्फ एक 🕷️ मकड़ी की तरफ़ इशारा नहीं है, दुनिया में 🕷️🕸️मकड़ियों की 40000 से भी ज़्यादा प्रजातियाँ पाई गईं हैं सभी मकड़ियों में कुछ न कुछ ख़ास होता है जैसे की कुछ विषैली होती हैं, सिर्फ एक प्रजाति को छोड़कर(Bagheera Kiplingi) सभी माँसाहारी होती हैं, किसी मकड़ी में परिवेश के अनुसार अपने को बदलने की शक्ति होती है ……


यह सिर्फ इसलिए ताकि आप कुरान की इस सूरः को बहतर समझ सकें इसलिए मकड़ियों के बारे में थोड़ा जानना ज़रूरी है ….


कुरान की आयत :


مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّـهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ


जिन लोगों ने अल्लाह से हटकर अपने दूसरे संरक्षक बना लिए है उनकी मिसाल मकड़ी जैसी है, जिसने अपना एक घर बनाया, और यह सच है कि सब घरों से कमज़ोर घर मकड़ी का घर ही होता है। क्या ही अच्छा होता कि वे जानते!


सूरः अनकबूत-41


विवेचना : इस आयत में अल्लाह ने उन लोगों कि तरफ़ इशारा किया है कि जो लोग सत्य और असत्य को जानते हैं और सत्य को स्वीकार भी करते हैं लेकिन दुनिया के आकर्षण कि वजह से वोह सत्य को छोड़कर असत्य की ओर भागता है इसलिए परमेश्वर ने मकड़ी की मिसाल देते हुए कहा कि.. "शक्तिशाली को छोड़कर एक कमज़ोर को अपना दोस्त अपना संरक्षक बना रहे हो जबकि उसका यह घर कमज़ोर है और जिस रचना (मकड़ी के जाले) को देखकर तुम आकर्षित हो रहे हो तो यह जान लो वो तुम्हारे सच्चे दोस्त नहीं बल्कि तुम्हें अपने जाल में फंसाकर तुम्हारे विनाश का कारण बनेगे"


और आज के समाज में है तमाम स्वघोषित भगवान, अवतार और संत मौजूद हैं जो लोगों को अपने जाल में फंसाकर खुद सुख भोग रहे हैं और आज अख़बार और टीवी पर ऐसी ख़बरें भरी पड़ी हैं


मकड़ी और जाल एक ऐसा शब्द है जिसमें इतना कुछ समाहित है जो निर्भर करता है व्यक्ति के ज्ञान और तर्क पर ताकि वोह स्वयं इसका विशलेषण कर सके


मकड़ी की मिसाल इसलिए दी ताकि हर व्यक्ति चाहे ज्ञानी हो या अनपढ़ वो इसको आसानी से समझ सकेI


يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَكُمْ هُزُوًا وَلَعِبًا مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلِكُمْ وَالْكُفَّارَ أَوْلِيَاءَ ۚ وَاتَّقُوا اللَّـهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ


ऐ ईमान लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो


सूरः अल-मायदा-53


इस आयत में परमेश्वर ने दूसरे धर्मों के लोगों को सचेत किया है, कि जब तुम्हें पवित्र पुस्तके दी गईं तो फिर तुम उन लोगों का अनुसरण क्यों करते हो जो तुम्हारे धर्म को हंसी-खेल बना रहे हैं… यह लोगो ईश्वर के और तुम्हारे शत्रु हैं इन्हें अपना मित्र न बनाओं I


وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَا إِلَّا الْعَالِمُونَ


ये मिसालें हम लोगों के लिए पेश करते है, परन्तु इनको ज्ञानवान ही समझते है


सूरः अनकबूत-43


काफी संक्षिप्त लिखने की कोशिश की है ताकि कम शब्दों में कई अर्थ अपने आप समझ आ जायेंगे … एक कहावत है … पढ़े-लिखे को इशारा काफी बेवकूफ के लिए लाइब्रेरी भी बेकार है I


लोग समझते हैं नास्तिक उसे कहते हैं जो परमेश्वर के अस्तित्व का इंकार करता हो और धर्मों को नहीं मानता हो लेकिन असल में नास्तिक हैं वोह लोग जो धर्म को अपने अनुसार चलाते हैं और परमेश्वर की बातों का विरोध करते हैं यह भी एक नास्तिक कि श्रेणी है


क्या कोई मुसलमान नास्तिक हो सकता है


मुस्लिम शब्द का शाब्दिक अर्थ है फरमाबरदार, जो निकला है इस्लाम से और इस्लाम के मतलब हैं अपने आपको आत्मसमर्पण कर देना ईश्वर अल्लाह के आगे। अपनी इच्छाओं को त्यागना और अल्लाह को अपने अच्छे कार्यों से खुश करना ये दर्शाता है कि मुस्लिम होने का मतलब। एक अल्लाह ईश्वर में विश्वास रखना,अंतिम पैगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब को आखरी नबी मानना क़यामत के दिन पर ईमान लाना मतलब एक दिन हर वियक्ती मारने के बाद उठाया जाएगा जिसे कयामत का दिन कहते हैं,  और वो अपने किए का हिसाब अल्लाह के यहां देगा जो भी उसने इस दुनिया में रहकर किया होगा अच्छे बुरे कर्म सब ईश्वर के सामने पेश होंगे।


मुस्लिम होने के लिए ये चीजें आवश्यक है तो जो भी वियक्ती यह बातो को नहीं मानता वो मुस्लिम हो ही नहीं सकता और नास्तिक तो वो होता है जो इश्वर में विश्वास नहीं रखता। मुस्लिम होने के लिए एक खुदा अल्लाह पर और इन सब बातो पर ईमान लाना आवश्यक है। कोई भी मुसलमान, नास्तिक नहीं हो सकता।


देखिये दुनिया में तो कोई हानि नहीं उठाएगा क्यूंकि ईश्वर की आखरी किताब में खुद ईश्वर ने कह दिया है की हमने मनुष्य को सही और गलत पथ बता दिया है अब उसकी मर्जी है की वो उसपे चले या न चले।


हाँ मरने के बाद क्या मामला होगा ये तभी पता चलेगा, यदि कोई नास्तिक व्यक्ति अपना पक्ष रख कर ईश्वर को संतुष्ट कर देगा की वो नास्तिक क्यों था तो ईश्वर की मर्जी है वो जो भी करे।


फिलहाल दुनिया में इससे कोई फायदा या नुक्सान नहीं होगा, यहाँ सबको पूरा टाइम दिया जायेगा।


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लोगो इस गुमराही से बाहर आ जाये


Aameen summa Aameen 


😭😭😭

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