हज़रत हूद अलैहिस्सलाम
दोस्तो अज़ीज़ साथियों हम जानेंगे
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम
का वाक्या और हज़रत हूद अलैहिस्सलाम को कौमें आद भी कहा जाता है, और कौमें आद और अहकाफ नाम कि एक बस्ती आबाद थी और अहकाफ अरबी में रेत के टीलों को कहते है यह इलाका समुंदर के किनारों पर था ,
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम- Hood a.s History in Hindi
अल्लाह तआला ने क़ुरआने करीम में हज़रत हूद अलैहिस्सलाम के बारे में इनकी के बारे में कोमे आद क़ौम के लोगों के लिए नबी बनाकर भेजा, वह कौम लम्बे कद, चौड़े जिस्म, और ताकतों वाली थी। सबसे लम्बा उसमें सौ गज़ का और गुठना साठ गज का था, वो लोग पत्थरों को काट कर पहाड़ों में मकान बनाते थे और अपनी पत्थरदिली की वजह से बुतों पर ईमान लाते थे। इनमें सिर्फ एक गिरोह था जो हजरत हूद अलैहिस्सलाम पर ईमान लाया था, लेकिन वो गिरोह भी मुखालिफों के डर से अपना ईमान छिपाता था।
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम का ज़िक्र क़ुरआन शरीफ में बार-बार आता है,,,,, सूर-ए-अअंराफ, सूर-ए-हूद और सूर-हश्र
वगैरह में इसकी तफसील मौजूद है।
हज़रत नूह अलैहिम्सलाम की औलाद, मुद्दतों तक दुनिया में 'बसी और आहिस्ता-आहिस्ता फिर खुदा तआला को भूल गई, शैतान ने फिर उनको बहका कर बुतों की पूजा पर लगा दिया, खुदावन्द तआला जो अपने बन्दों पर बड़ा रहम करने वाला है, उसने फ़िर
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम को अपना पैग़म्बर बना कर उन लोगों के पास भेजा, और उन्होंने अपनी कौम में जो आद कहलाती थी कहा कि तुम खुदा ही की इवादन करो, इसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है, मैं तुम से इस वअज़ व नसीहत के बदले कोई मज़दूरी या उजरत नहीं मांगता, मुझे इसका बदला तो वह देगा जिसने मुझे पैदा किया है. और ऐ मेरी कौम तुम अपने रब से बख्शिश मांगो और इससे नौवा करो, वह तुम्हारे लिए मेह बरसाएगा जिससे तुम्हा खेत और वागान अच्छे होंगे और तुम्हारी ताक़त बहुत बढ़ा देगा। वह वाले कि ऐ हूद हम तुम्हारे कहने से अपने बुतों को नहीं छोड़ मकनं, तुम कोई निशानी दिखाओ, हम तो यह समझते हैं कि हमारे बुनों में से किसी ने तुम पर आमेब कर दिया है, और नुम दीवाने हो गए हो।
हज़रत हूद अलैहि सलाम और क़ौमे आद-Hazrat Hood A,S History in Hindi
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने कहा कि तुम सब मिल कर मेरे लिए जो तदबीर करनी चाहो कर लो, और मुझे मुहलत भी न दो, ख़ुदा पर भरोसा रखता हूं, जो मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है. मेरा हाथ अल्लाह तआला ने तुम्हें जो पैगाम भेजा था वह मैंने तुम्हें - पहुंचा दिया, अगर तुम मेरा कहना न मानोगे तो अल्लाह पाक तुम्हारी जगह और लोगों को बना देगा और तुम खुदावन्द तआला का कुछ नुक्सान नहीं कर सकते, इस पर उनकी कौम ने कहा कि ,
रोज़ तू हमें ख़ुदा के अज़ाब से डराता है, जा अपने खुदा से कह कि हम पर अज़ाब नाज़िल कर दे और इसमें हरगिज़ देर न करे हज़रत हूद अलैहिस्सलाम पर जो ईमान लाए थे वह ग़रीब और कमज़ोर थे, और जो काफिर थे वह मालदार और सरदार थे। उन सब ने हज़रत हूद अलैहिस्सलाम का मजाक उड़ाया, आसमान पर एक बादल नमूदार हुआ जिसे देखकर यह समझे कि बारिश होने वाली है, हज़रत हूद अलैहिस्सलाम को अल्लाह तआला ने बता दिया था कि यह अज़ाब है चूनांचे वह ईमानदार लोगों को ले कर बस्ती से बाहर चले गए, उस बादल के बाद आंधी आई जो आठ दिन और मात रात तक मु-तवातिर चलती रही यहां तक कि सब काफिर मर गए और नेस्त व नाबूद हो गए, सिर्फ अल्लाह तआला पर ईमान लाने वाले ही बाक़ी बच गए, और इस तरह एक बार फिर अल्लाह तआला की ज़मीन काफिरों और मुश्रिकों से खाली हो गई ,
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